पत्थर से बनी इस मिट्टी के दीये की बाती है
इसे जलाऊं तो जलाऊं कैसे
किस्मत की अमिट रेखाएं
जो खींची हुई हैं जिंदगी की तस्वीर के माथे पर
उन्हें मिटाऊं तो मिटाऊं कैसे।
पत्थर से बनी इस मिट्टी के दीये की बाती है
इसे जलाऊं तो जलाऊं कैसे
किस्मत की अमिट रेखाएं
जो खींची हुई हैं जिंदगी की तस्वीर के माथे पर
उन्हें मिटाऊं तो मिटाऊं कैसे।
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