पैसों की झंकार हो
रूपयों की बरसात हो
क्या यही है तेरी चाहत
तेरी हसरत
तेरी इबादत
इंसान की हो जो ऐसी फितरत तो फिर उसके जीवन का बेड़ा कैसे पार हो
धन आवश्यक है लेकिन
लालच हद से बढ़ जाये तो
समृद्धि का नहीं अपितु
बने विनाश का कारण
हर चीज की एक हद तय करो
जितनी जरूरत है
बस उससे ज्यादा अपनी जेब में
कुछ भी भरने की कोशिश मत करो जीवन मात्र धन कमाना
शोहरत पाना
ऐशो आराम के साधन जुटाना आदि
नहीं है
जीवन में छोटी-छोटी बातों से
खुशियां बटोरना न सीखा तो
यह कुबेर का खजाना अकेला
तुम्हारा कब तक सहयोग कर
पायेगा।
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