दिल कितना खाली है
एक गहरे कुएं सा
एक गहरी नींव तो पहले से ही खुदी हुई है
उसे और अधिक गहरा करने की आवश्यकता नहीं है
ऐसा लग रहा है कि
इसमें खुद के रहने की
एक स्थाई व्यवस्था कर लूं
हमेशा के लिए
एक मकान बना लूं
अपने नाम का और
इसमें रहना शुरू कर दूं
न जमीन के पानी की प्यास हो
न किसी आसमान की मंजिल
की तलाश हो
न किसी ताजा हवा के झोंके की
फूलों से महकती सुगंध पाने के
लिए मन में कोई तलब जगे
न इस दुनिया की हलचल की
कोई शक्ल मुझे दिखे
न मुझे किसी परिंदे की
परछाई पानी में पड़ती दिखे
न वह मुझे कहीं आसमान में
उड़ता या
मेरे कुएं की मुंडेर पर बैठा मुझे
दिखे
मुझे छोड़कर सब कहीं दूर चले
जाओ और
मुझे भी हर किसी से दूर हो
जाने दो
मुझे मेरी हदें जानने दो और
मुझे मेरी पनाहों की ही
नरम तो कभी गरम सांसों की
कैद में हमेशा के लिए
जज्ब होकर उसमें एक कब्र सा ही
समाने दो।
0 Comments