दिल की बगिया में
फूल खिलते रहें
बारह मास रहे
बहारों की रौनक से गुलजार
एक पल को
सपनों के धरातल पर भी न हो
पतझड़ के मौसम का दीदार
दिल के मंदिर की देहरी पर
दीप जगमगाते
सितारों के रोशन संसार से भी जलें
बेशुमार
दिल की गली में
यौवन की धूप खिली रहे
चांद की बाती जली रहे
तारों की बारात रात भर
जुगानुओं की चमक सी टिमटिमाती
चलती रहे
नित नये रूप नई नवेली दुल्हन से
कलियों का सौंदर्य समेटे खिलें
नई कोपलों में स्वर की
निर्मल सुरीली कोमल धारायें फूटें
रंगों का एक संसार
एक सुंदर रंगोली सा सजे
किरणों का एक सुनहरी जाल
रोशन सवेरे सा
अंधकार को प्रकाशमय करता
चहुं दिशाओं में फैले
दिल के आंचल में जो भी
हसरतें पलती हों
उन्हें अपनी ही कल्पनाओं की
उड़ान का एक ममतामयी जीता जागता सा
स्पर्श मिले।
0 Comments