दिन सुनहरा तब होता है
जब मन में ठहराव हो
रात में चांद भी
दिल के आंगन में तभी उतरता है
जब दिल शांत हो
उसमें कोई हलचल न हो
वह बिना बात हैरान परेशान न
होता हो
इस जीवन की यात्रा
पूरी होती है
आहिस्ता आहिस्ता
संयम बरतने से
तेज कदमों से चलने पर तो
अक्सर ठोकर ही लगती है
जिंदगी का सफर
मौत के पश्चात भी
बदस्तूर जारी रहेगा बशर्ते
धीरज धरा तो।
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