दर्पण का टूटना लाजमी है


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मेरा दिल टूट गया है और

मेरे कक्ष में लगा मेरा इकलौता दर्पण भी

दर्पण का टूटना लाजमी है

इसको तो टूटना ही था

यह सच जो बोलता है

यह जो न टूटता तो

मेरे दिल के टूटने का सच

यह दुनिया के सामने उजागर नहीं कर

सकता था

सुख में तो सब साथ देते हैं

चलो दुख की घड़ी में

इस बेजान चीज ने मेरा साथ तो

निभाया

मैं जब तक साबुत थी

यह भी सही सलामत था

मैं तो जर्रा जर्रा टूट कर बिखर गई

यह भी चटक गया और

इसका सारा बदन छलनी छलनी होकर

दर्द से रिसती हुई दरारों से भर गया

इसमें खुद को देखती हूं अब तो

मेरे अनगिनत अक्स बनते हैं

सब टूटा हुआ एक दिल लिए

मेरे अपने टूटे हुए दर्पण के ही साथ।


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