दर्द के दरिया


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अपने अपने नहीं
परायों को अपना बनाने की
कोशिश है
हाथ आखिर में कुछ नहीं आयेगा लेकिन ऐसे लोगों को होता फिर भी नहीं कोई अफसोस है
जिन्हें ठुकराया जाता है
कभी अपनाया नहीं जाता है
दिल तो उनके टूटते हैं जो
कभी जुड़ते नहीं
दर्द के दरिया तन बदन में उनके
बहते हैं जिन्हें
न कभी कोई रस्ता मिलता और
न ही समुन्दर के घर का पता।


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