तेरे बिना इस सृष्टि का हर कण अधूरा


0

प्रेम की 

एक जीती जागती मूरत है 

तू ऐ स्त्री, 

तेरे बिना 

इस सृष्टि का 

हर कण अधूरा, 

सूना और 

बेजान है।


Like it? Share with your friends!

0

0 Comments

Choose A Format
Story
Formatted Text with Embeds and Visuals