तेरे दिल को जो
मैंने छू लिया तो
दुनिया की तमाम खुशियों को
मैंने पा लिया
तेरे हाथों को जो स्पर्श किया तो कायनात की सारी बहारों का जैसे मैंने हो
दीदार किया
तू चाहे दूर हो या
रहे मेरे बेहद करीब
देखा जाये तो कुछ कुछ
एक जैसा ही अहसास है
इसकी वजह बस यही कि
तू मुझे एक इंसान नहीं
फरिश्ते सा लगता है
तू मुझे मेरी रूह में बसा
मेरा अपना ही कोई अक्स लगता है
तू मुझे ईश्वर सा लगता है
मैं तुझे कण कण में देखती हूं
तू मेरे जर्रे जर्रे में बसता है।
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