तुम अब जैसे मेरे साथ हो
ऐसे ही आगे भी रहना
एक पल के लिए भी मुझसे कभी
जुदा मत होना
सांझ को सूरज ढल जाता है
अगली सुबह फिर उगता है
आसमान का साथ वह छोड़ देता है
रात भर के लिए लेकिन
मुझे यह तुम संग गवारा नहीं
प्रकृति के नियम भी मुझ पर
लागू मत करना
जिंदगी की उम्र वैसे ही
बहुत छोटी है
मुझसे अलग होकर
उसे और छोटा मत करना।
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