तुम्हारे हाथों से बनी चाय की एक प्याली का


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आज सुबह का मौसम
सुहाना है
चाय का यह बागान भी
तुम्हारा है
यह घर भी तुम्हारा है
यह बैठक भी
यह रसोई भी
तुम्हारे घर में क्या मुझे
सुबह सवेरे प्रवेश मिलेगा
कुछ पल तुम्हारे साथ गुजार
सकने का अवसर मिलेगा
तुम्हारी कुर्सी पर बैठकर
तुम्हारी मेज पर अपने
बाजू की कोहनी टिकाने का
हौसला मिलेगा
तुम्हारे साथ दिल की
बातें करने का तुम्हारी खिड़की
से आती ठंडी पुरवाई के झोंके सा
एक तोहफा मिलेगा
तुम्हारे मखमली हाथों से
बनी गरमा गरम चाय की
एक प्याली का तुम्हारे व्यक्तित्व
की सुंदरता की मीठी चाशनी
सा स्वाद सिप सिप करके
पीने का सौभाग्य मिलेगा।


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