ओ मनमोहिनी
तुम तो आज नृत्य कर रही हो
एक राधा सा
मधुबन में होकर खड़ी
कृष्ण कन्हैया की याद में
सांझ का समय है पर
चारों तरफ फैले अंधेरों में भी
उजाले हैं जो
यह संकेत दे रहे हैं कि
तुम्हारे श्याम तुम्हारी देहरी पर
अवश्य पधारेंगे
तुम्हारे इंतजार की घड़ियां खत्म
हो जायेंगी
एक सुखद मिलन का दृश्य
फिर घटित होगा
तुम्हारी सारी विरह की
पीड़ा पलक झपकते मिट जायेगी
तुम्हारे साथ फिर तुम्हारे कान्हा
रासलीला रचायेंगे।
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