दुनिया के समक्ष
यह साबित मत करो कि
तुम एक योद्धा हो
तुम क्या हो
एक जीते हुए इंसान या
हारे हुए
तुम्हारी किसी भी बात से
किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता
तुम्हें अपनी सफलता की खुशी
मनानी है तो
कहीं खुद के दिल के भीतर ही
इस जीत को दर्ज करो और
अपनी उपलब्धि
चाहे छोटी हो या फिर बड़ी का
उत्सव मनाओ
तुम खुद को
अपने जीवन के युद्ध में
एक सफल योद्धा मानते हो या
असफल
यह तुम्हारी सोच पर
निर्भर करता है
तुम्हारी खुशियों या
सफलताओं की पिटारी की चाबी
तुम्हारे हाथ में है
इसका नियंत्रण
किसी और के हाथ में
देने की
कभी भूल भी
मत करना।
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