फूल जो तुमने मेरे लिए
छोड़े थे
वह थे तुम्हारी यादों के फूल
जिनकी महक मेरी सांसों से कभी जाती नहीं
यह मेरे मन के उपवन में खिले
ऐसे फूल हैं जो कभी मुरझाते नहीं
इसकी बहारों के मौसम पर कभी पतझड़ की बयार आती नहीं
तुम्हारी यादों के फूल असंख्य हैं
रंग भी इनके बेहिसाब हैं
यह चांद से सुंदर और सलोने हैं और
सितारों से लुभावने
रोज सुबह एक सूरज की तपिश से
मेरे तन बदन को गर्माते हुए
मुझे नींद से जगाते हैं
रात को चंदन वन की एक भीनी भीनी
महक की पुरवाई से
मुझे गहरी नींद सुलाते हैं
मैं तुम्हारे बिना
इन जीवन की राहों पर
अकेली चलते-चलते भटक जाती लेकिन
तुम्हारी यादों के फूल
मेरे पग में फूलों के बिछौने होने से बिछ
जाते हैं और
कांटो की चुभन से छलनी होने से मुझे
हरदम ही बचाते हैं
तुम्हारी यादों के फूल मुझ बेसहारा को
कितना सहारा देते हैं
उसका तुम्हें कुछ भी अंदाजा नहीं
तुम्हारी यादों का दरख़्त
एक मजबूत जड़ों वाला जो न तना हुआ
खड़ा होता मेरे सीने में
यादों की डालियों पर
तुम्हारी यादों के फूलों से लदे तो
मेरा हश्र तो पतझड़ की बर्बादियों सा होता
तुम्हारी यादों के फूल तो हमेशा
महकते रहते हैं
खिले रहते हैं
मुस्कुराते रहते हैं
क्या यह तुम्हें पता है किस लिए
मैं महकती रहूं
खिली रहूं
मुस्कुराती रहूं
तुम्हारी यादों के फूलों की ही तरह
बस शायद इसलिये।
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