बहारों के दिन
जो पलछिन
गुजारे साथ तुम्हारे
अब कभी लौटकर नहीं आयेंगे
पेड़ों पर पत्ते,
पौधों पर फूल
बहारों के आगमन पर आयेंगे लेकिन
वह जो थे पुराने वाले
दोबारा उग नहीं पायेंगे
तुम्हारी यादों की बहारों से महकता है
अब तो मेरे दिल का उपवन
भीतर है एक हलचल
बाहर पसरी एक गहन खामोशी
फूल कोई नहीं चुनना मुझे
बागों की नई बहारों से
मैं तो सराबोर हूं
दिन-रात नहा रही
अपनी ही पुरानी यादों की बहारों की फुहारों में।
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