तुम्हारी जिंदगी की कहानी


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अपनी डायरी के
पन्ने पर
कुछ लिखते लिखते
एकाएक क्यों रुक गये तुम
किस सोच में पड़ गये तुम
कहां गुम हो गये तुम
माना कि
तुम्हारी जिंदगी की कहानी
अभी तुम्हारी तरह ही छोटी है
जितनी बीती
उतनी लिख ली
उससे आगे क्या लिखूं
यह कल्पना शायद नहीं कर पा रहे तुम
तुम्हारी उम्र तो अभी है
खिलौनों से खेलने की
उनमें चाबी भरकर
उन्हें चलाने की
उनके पीछे-पीछे
एक साये सा चलने की
कागज के हर कोने में
तरह-तरह की आकृतियों को उतारकर
उनमें नाना प्रकार के रंगों को
भरने की
तुम्हारी उम्र अभी नहीं है
एक गंभीरता की मुद्रा धारण
करने की
किसी भी विषय को लेकर
बहुत अधिक चिंता करने की
खेलकूद की गतिविधियां कम करके
पढ़ाई लिखाई में ध्यान अधिक लगाने की।


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