तुम्हारी खामोशी
मेरे मन में एक टीस सी पैदा
करती है
जो भी हो कारण लेकिन
इसके लिए कहीं मैं खुद को
दोषी ठहराने लगता हूं
थोड़ी बहुत देर के लिए कहीं
सन्नाटा पसरा हो तो
समझ आता है
एक हद पार करे तो
चिंता के साथ-साथ
क्रोध भी मन में उत्पन्न
हो जाता है
खुद को सुधारते रहना
यह कई बार खुद की भी
जिम्मेदारी होनी चाहिए
हमेशा दूसरों से इसकी अपेक्षा नहीं करनी चाहिए
इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि आप उपेक्षित हैं बस
कहने का तात्पर्य है
जीवन की कठिनाइयों को
समझने की कोशिश करें
इन्हें सुलझाते रहें
इनसे लड़ते रहें लेकिन
इनमें उलझे नहीं
हताश न हों
निराश न हों
खामोश न हों
एक लंबे समय के लिए तो
कतई नहीं।
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