तारों भरी रात हो
अंधेरों का साथ हो
तन्हाई का आलम हो
आंखों में नींद की बरसात हो
ऐसे में छत पर
चारपाई पर बिना बिस्तर के
तकिये पर टिकाकर सिर
सितारों से टकी रात की चादर के शामियाने के नीचे
दिल रब से मांगता है कि
उसे इन तारों की बारात का
आज की रात सुबह तक का साथ मिल जाये
जाग रहा हो तब भी
वह सो जाये तब भी
मां की गोद की कमी कर दें यह तारे पूरी
उसे लोरी गाकर एक सुकून भरी नींद सुला दें
आसमान से उतर आयें जमीं पर या
जब वह गहरी सपनों भरी नींद सो जाये तो
उसे आसमान में अपने पास बुला लें जमीं से
दिल में जो सपना पले
वह सच तो होता है
सितारों का जहां कहने को है दूर लेकिन
आंखों से दिल के करीब ही कहीं दिखता है
तारों भरी रात से जो मुराद मांगों वह पूरी अवश्य होती है
तारे सुनाते हैं रात भर एक सपनों सी सुंदर लोरी तुम्हें सुलाने के लिए
एक प्रेम भरा गीत भी सुनाते हैं सुबह फिर तुम्हें जगाने के लिए।
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