यह तो प्रकृति का नियम है
इससे कोई बच नहीं सकता
ग्रहण तो हर किसी के जीवन में
लगते रहते हैं
तुम आशावादी हो या
निराशावादी
इससे समय की धारा को
कोई फर्क नहीं पड़ता
ग्रहण खुद ब खुद अपनी
चाल चलते हुए
एक सटीक समय पर
छंटते भी हैं
अंधेरा जो छाता है
वह कुछ समय के लिए होता है लेकिन फिर वह उपहार के तौर पर
प्रकाश ही लाता है
आवश्यकता है
हर किसी को
थोड़ा धैर्य धरने की
कोई भी रास्ता
हमेशा सीधा नहीं होता
कहीं न कहीं उसमें उतार चढ़ाव या मोड़ अवश्य आते हैं लेकिन
इसका अर्थ यह कदापि नहीं कि
वह मंजिल तक नहीं पहुंचायेंगे
जीवन में कोई ग्रहण लग भी
जाये तो क्या
जब हटेगा तो
सूरज का प्रकाश फैलायेगा या
चंद्रमा की रोशनी ही लहरायेगा।
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