जिन्हें एक बंद कमरे में


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भ्रमण की लालसा
उन्हीं को अधिक होती है
जिन्हें अपना घर
अपना मोहल्ला
अपना शहर प्यारा नहीं होता
जिन्हें एक बंद कमरे में
सारी दुनिया मिल जाती है
फिर उन्हें दुनिया में भ्रमण
करते रहने से भी
दुनिया का कोई सुख प्राप्त
नहीं होता
मनुष्य को आदत पड़ी होती है
स्थान बदलते रहने की
लोग बदलते रहने की
परिस्थितियां बदलते रहने की
बदलाव होता है लेकिन
बस कुछ देर के लिए
वापिस लौटकर तो फिर
अपनी गली
अपनी दहलीज
अपने दरवाजे तक ही आना
होता है
भ्रमण करने से कुछ
हासिल होता है तो ठीक
अन्यथा
किसी चीज की अति
एक पागलपन ही है।


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