शतरंज का खेल
खेलने में
महारत हासिल है मुझे
यह खेल मैं
जिंदगी की बिसात पर भी
खेलता हूं
आज तक कोई बाजी हारा नहीं हूं मैं आज तक कोई मुझे मात नहीं दे पाया आज तक एक राजा की गद्दी से
कोई मुझे हटाने की जुर्रत नहीं कर पाया
जिंदगी की जंग जीता हूं मैं लेकिन
सब कुछ हारकर
जंग के मैदान में
चारों तरफ लाशों के ढेर हैं और
मैं अपनी जीत पर मुस्कुरा रहा हूं लेकिन
क्या मैंने सच में फतह हासिल करी है यह सवाल शायद अभी तो नहीं लेकिन कुछ समय पश्चात
उम्र भर के लिए
मेरा जीना मुहाल करने वाला है
मेरे जेहन में यह रह रहकर
कौंधने वाला है
दिन भर रुलाने वाला है और
रातों को मेरी चैन की नींद भी
छीनने वाला है।
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