एक खिड़की खुली है, दूसरी बंद है
रास्ते हजार हैं लेकिन मंजिल एक है
मेरा साया यूं तो है मेरे साथ लेकिन
कहने को मुसाफिर मैं एक हूं
जिंदगी एक सफर सी लगे और
मौत क्या है
इसका एक चरम बिंदु!
एक खिड़की खुली है, दूसरी बंद है
रास्ते हजार हैं लेकिन मंजिल एक है
मेरा साया यूं तो है मेरे साथ लेकिन
कहने को मुसाफिर मैं एक हूं
जिंदगी एक सफर सी लगे और
मौत क्या है
इसका एक चरम बिंदु!
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