खुशबू आती ईश्वर के स्मरण से भी


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एक हवा का झोंका आया था
खुशबुओं भरा
पलक झपकते ही पर
गुजर गया
एक चिड़िया जैसे बैठी हो
पेड़ की एक डाल पर
इस पल और
वह उड़ जाये फिर
अगले ही पल
हाथ भी जैसे वह न आये
ऐसे ही हवाओं संग उड़ गई
खुशबू भी हाथ न आये
एक खुशबू भरा अहसास तो पर
कहीं वह दे जाये
उसके स्मरण मात्र से
मन फिर एक सुगंधित धारा से
भर जाये
महक जाये
आनंदित हो जाये
खुशबू आती
फूलों से,
चंदन बन से,
ईश्वर के स्मरण से भी
आत्मा जो किसी की शुद्ध हो तो
उसका तन महकता
गुलाब के फूलों सा और
मन चंदन की सुगंधित
एक पावन धूप सा।


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