लिखने जो कुछ बैठती हूं तो
लिखती चली जाती हूं
सुनने कुछ लगती हूं तो सुनती
चली जाती हूं
बोलना जो शुरू कर देती हूं तो
बोलती चली जाती हूं
खामोश जो कभी हो जाऊं तो
बस गमगीन होकर
तन्हाइयों में
उदासियों में
रुसवाईयों में
डूबती चली जाती हूं।
लिखने जो कुछ बैठती हूं तो
लिखती चली जाती हूं
सुनने कुछ लगती हूं तो सुनती
चली जाती हूं
बोलना जो शुरू कर देती हूं तो
बोलती चली जाती हूं
खामोश जो कभी हो जाऊं तो
बस गमगीन होकर
तन्हाइयों में
उदासियों में
रुसवाईयों में
डूबती चली जाती हूं।
0 Comments