सारे रास्ते बंद हैं,
मैं कौन सा रास्ता निकालूं!
गौर से देखा तो पाया
जमीं के बंद थे पर
आसमां के खुले तो
क्यों न अब जमीं के रास्तों को छोड़कर
आसमां में एक पंछी सा
पंख फैलाकर उड़ा जाये और
अपने जीवन की आगे की यात्रा तय
करी जाये।
सारे रास्ते बंद हैं,
मैं कौन सा रास्ता निकालूं!
गौर से देखा तो पाया
जमीं के बंद थे पर
आसमां के खुले तो
क्यों न अब जमीं के रास्तों को छोड़कर
आसमां में एक पंछी सा
पंख फैलाकर उड़ा जाये और
अपने जीवन की आगे की यात्रा तय
करी जाये।
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