कोई बताये कि
मैं इश्क किससे करूं
मेरे पास कोई इंसान नहीं है
कोई इंसान है तो
उसमें इंसानियत नहीं है
मेरे दिल का
दिमाग का
आत्मा का
जज्बातों का
मानसिक स्थिति का
बौद्धिक स्तर का
कहीं से कुछ भी उठा लो
इस दुनिया में किसी से कोई मेल नहीं है मुझे तो पसंद है
घूम फिर कर वही एक रोमांटिक मौसम अपने मूड को रोमांटिक बनाने के लिए
मैं और मेरी तन्हाई
एक लंबी सुनसान खाली सड़क
उस पर चलती हुई मैं
आंखों में ख्वाब
होंठ खामोश
दिल में घुमड़ते बादलों से
बेहिसाब ख्यालात
रिमझिम बारिश की फुहारों से
मुझ पर बरसते सड़क के दोनों ओर
लगे दरख्तों से झर झर गिरते
हुए पत्ते
मेरे अहसासों को संजीदगी से
छूकर गुजरते यह मोहब्बत भरे
प्यालों के जामों से पत्ते और
मंद मंद चलती हुई
मेरे चारों ओर एक घेरा बनाकर
मुझे अपनी बाहों में कसकर कसती हुई हवाओं का मुस्कुराता हुआ सा एक काफिला मेरे आशिकों का।
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