विवाह के समय तो
बंधते हैं दो दिल और
दो परिवार
जन्म-जन्मांतर के बंधन में लेकिन
क्या इन संबंधों को
वह निभा पायेंगे आगे भी
पूरी शिद्दत के साथ और
वह भी रीति-रिवाज़ों और परंपराओं को साथ लेकर
एक शिष्टाचार के अभाव में
कई रिश्ते जो प्रारंभिक अवस्था में
एक शीशे से चमकते दिखते
कुछ समय पश्चात ही
चकनाचूर होकर टुकड़े-टुकड़े बिखर जाते
दिल के जर्रे जर्रे
हर कोने में
कोई किसी मान्यता का अनुसरण करे या न करे लेकिन
सामने वाले को उसके व्यवहार में कोई कमी
न दिखे
इसका उसे भरसक प्रयत्न करना चाहिए
दुनिया को दिखाने भर के लिए लेकिन
इन भारी भरकम रिवाज़ों और परंपराओं का
कोई पालन बेशक न भी करे लेकिन किसी के मान सम्मान
उससे दिल से प्यार और
अपने आत्म सम्मान को भी कहीं
ठेस न पहुंचे
यह ख्याल तो अवश्य रखे।
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