कहीं भी बैठे हों और
किसी एंबुलेंस के
सायरन की आवाज
कानों में सुनाई पड़ जाये तो
मेरा तो कलेजा कांप जाता है
मन तत्काल प्रभाव से
उसमें पड़े हुए मरीज की सलामती के लिए
ईश्वर से हाथ जोड़कर प्रार्थना करने लगता है
वह जो कोई भी हो लेकिन
अस्पताल से स्वस्थ होकर
अपने घर ठीक-ठाक वापस लौटे
मेरा रोम रोम उस पल बस यही
कामना करता है
इस संसार में
हर कोई खुश रहे
किसी पर कभी कोई दुख का
पहाड़ न टूटे
कभी कोई बीमार न पड़े
उसे कभी अस्पताल का मुंह न
देखना पड़े
उसे मरीज बनकर चिकित्सकों के
चक्कर न काटने पड़े पर
दुर्भाग्यवश
ऐसा कुछ घटित हो भी जाये तो
वह व्यक्ति जल्द से जल्द ठीक
होकर
अपने काम पर वापस
लौटे
घर परिवार दोस्तों के बीच बैठे और
परिंदों सा चहके
वह आजीवन स्वस्थ रहे
तन से और मन से
दीर्घायु प्राप्त करे
अपनी अंतिम श्वास तक
मुस्कुराता रहे
इससे अधिक की लालसा
मनुष्य जीवन में फिर करनी भी क्या
यह खुद में ही एक बहुत बड़ी सफलता और
उपलब्धि है
कोई इसके महत्व को समझे तो।
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