कहने को तो हाईवे है


0

कहने को तो
हाईवे है
दिखने में साफ सुथरा
एकदम स्वच्छ
कोरे कागज सा गोरा
दर्पण सा चमकता
चांद सा दमकता
सूरज सा उगता
फूल सा महकता
कलियों सा लचकता लेकिन
हादसों का कब टूट जाये
इस पर कहर
यह कहना मुश्किल है
जिंदगी की गाड़ी को तो
चलाना है
आगे का सफर पार होगा या
थम जायेगा
यह सोचे बिना
एक ढलान सी पटरी पर
फिसलते चले जाना है
अपने हाथ में तो केवल
खुद को नियंत्रित करना
बाकी अपने बंदे को किस हाल में रखना है
यह खुदा जाने।


Like it? Share with your friends!

0

0 Comments

Choose A Format
Story
Formatted Text with Embeds and Visuals