कभी अंधे भी जो हो जायें


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हर समय कांड करती है लेकिन
आंखों में शर्म नाम की
अगली के कोई चीज नहीं
ऐसे लोग जीवन में कभी
अंधे भी जो हो जायें तब भी
अपनी कारस्तानियों से
बाज नहीं आयेंगे
दर्पण में देख नहीं सकते होंगे
अपना चेहरा लेकिन
आंखों में शर्म की कोई लहर
अब भी भूले से नहीं
लहरायेगी।


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