ऐ सूरज! तुम किसी चक्रवर्ती राजा समान हो


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आसमान से उतरकर

सूरज तुम आज आ जाओ

ना मेरे पास लेकिन

मुझे जला मत देना

मेरे भीतर निहित बुराइयों को

बेशक जला देना लेकिन

मेरी देह, मेरे अक्स या

मेरी आत्मा

उन्हें मत जलाना

क्या तुम सूरज होते हुए भी

मुझे एक चांद सी शीतलता दे सकते हो ‘नहीं ना’

देखा तुम इतने विशाल स्वरूप

के होते हुए भी

यहां छोटे पड़ गये

यह काम तुम नहीं कर सकते

तुम्हारा कार्य है

हर सुबह उठकर

इस संसार में उजाला

फैलाना

रात्रि के अंधकार को कोसों दूर

भगाना

संसार में विचर रहे प्रत्येक

जीव के दिल में अपने

प्रकाश के सौ सौ दीपक जलाना

उन्हें भी उनके कार्य में जुटने

के लिए नित दिन प्रेरित करना

यह काम भी कोई छोटा नहीं है

कोई कार्य बड़ा या छोटा

नहीं होता

हर कोई महान है इस

धरा पर

यह तो हममें से कुछ तुच्छ

प्राणी होते हैं जो किसी को

उसके छोटेपन का अहसास  

दिलाते हैं

ऐ सूरज! तुमसे मैंने बहुत

कुछ सिखा है

तुम महान हो

चरित्रवान हो

इस धरा पर आसमान में

चमकते हर सुबह

यह क्या कम है

तुम एक रोशनी के पुंज

दीपदान से सदैव ही नित नये

कीर्तिमान स्थापित करते

किसी चक्रवर्ती या चक्रधारी राजा समान हो।


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