ऐ नीले फूल
हरी पत्तियों के साथ
तुम एक मोर से
पंख फैलाये
हवाओं संग नृत्य करते
कितने सुंदर प्रतीत होते हो
तुम्हारी सुंदरता से आकर्षित हो
उपवन के भंवरे तुम पर मंडराते
रहते हैं
कभी तुम्हारे समीप आते हैं
कभी तुमसे दूर चले जाते हैं
तुम हो कि उनके इस खेल से
अंजान हो
अपनी ही दुनिया में मगन
अपने मन की सुंदरता से
भी अनभिज्ञ
एक तपस्वी से
अपनी बनाई एक अलौकिक दुनिया
में लीन।