25.04.2025 शुक्रवार
मुझे कल दिल्ली जाना है
ए एल एस लिटफेस्ट 2025 जो है
समय सुबह 9:30 से दोपहर 2:00 तक
वेन्यू: डेलनेट, वसंत कुंज, नेल्सन मंडेला मार्ग, नई दिल्ली
अलीगढ़ से दिल्ली जाना है तो तैयारी तो कई दिनों पहले शुरू हो जाती है जैसे सिर से नहाना, सूट प्रेस करना, बैग तैयार करना आदि।
थोड़ा सा खुद को मानसिक रूप से भी तैयार करना है जैसे कविता पाठ करना है तो कविता जो पढ़नी है वह साथ में लेकर चलनी है
कार, ड्राइवर और जो कोई साथ चल रहे हों
उन्हें सूचित करना
एक साथ निकलने के लिए
एक समय सीमा निर्धारित करनी
कहीं कुछ छूट न जाये चलते समय
यह चिंता बनी रहती है
चलते समय सामान को दोबारा, तिबारा चेक करना
सुबह जल्दी उठना है
समय से निकलना है
ठीक समय पर पहुंचना है नहीं तो अलीगढ़ से दिल्ली उठकर जाने का क्या औचित्य।
इस बार मेरे साथ केवल राजू (ड्राइवर) और प्रदीप कुमार चौहान ही थे
फिरोज को शाम को
अपने परिवार के साथ आगरा
जाना था अपने चाचा के लड़के की शादी में
देर रात अपने घर वापस लौटने पर उसका सुबह दिल्ली चलना नामुमकिन ही था
रोहित की तबीयत कुछ ठीक नहीं थी तो वह भी साथ चलने को तैयार नहीं हुआ।
26.04.2025 शनिवार
सुबह 6:00 बजे मैं चलने को थी एकदम से तैयार
राजू भी घर से निकल चुका था
प्रदीप चौहान को उसके चाचा का लड़का बाइक से लेकर आ रहा था
मैं खुश थी कि अभी तक तो सब ठीक ठाक चल रहा है
मेन गेट पर अजय सक्सेना मिले जिनकी ड्यूटी 7:00 से शुरू होती है मुझसे मिलने के लिए वह
थोड़ा सा जल्दी पहुंच गये
ठीक 6:30 बजे हम तीनों कार में सवार होकर दिल्ली के लिए निकल पड़े थे ठीक 9:00 बजे डेलनेट पहुंच गये मनोज कृष्णन जो ए एल एस के संस्थापक हैं ने हमेशा की ही तरह गर्मजोशी से मेरा स्वागत किया आखिरकार लिटफेस्ट सरस्वती वंदना व दीप प्रज्वलन के साथ आरंभ हो गया और सफल रहा
11:30 पर टी/ कॉफी ब्रेक हुआ
चाय, कॉफी, समोसा,दो तरह के बेकरी के बिस्किट्स, केक आदि था
वहां के वातावरण का हर क्षण
प्रसन्नता से भर देने वाला होता है
मुझे और अन्य लोगों को
तरह तरह से सम्मानित किया गया
दिल में ढेर सारी सुनहरी यादों को
समेट कर वहां से विदा लेने का समय आ गया
लगभग 1:30 बजे दोपहर यह फेस्ट संपन्न हो गया था
डेलनेट से निकलकर
मैं पहुंची अपनी मित्र नीरा के घर जो पास ही था
उसका बेटा देवांश भी घर पर था
जाते ही हम सबने जूस पीया
बनाना शेक पीया
दो तरह के बिस्किट,
दो तरह की नमकीन आदि लिये
नीरा ने तोरई बना रखी थी
साथ में मूली का लच्छा भी था
उसने कहा मैं दाल बना लेती हूं
सब खाना खा लो
खरबूजा भी काट कर सबको
खिलाना चाहती थी
गर्मी में इतना सब नहीं
जाने की भी हमें जल्दी थी
हमने यह सब नहीं लिया
देवांश पाइनएप्पल और चॉकलेट पेस्ट्रीज ले आया
वह सबने चाव से खा ली
नीरा सूट बदलकर मुझे
मेरी ताऊजी की बेटी जो आईआईटी में रहती और पढ़ाती भी है के यहां ले गई मोनिका और उसके पति वेंकट घर में मिल गये
मोनिका की दो बेटियां हैं जो
जुड़वा हैं
एक बेटी पढ़ रही थी
दूसरी सो रही थी
मोनिका ने भी सबको
बादाम का शरबत पिलाया
आइसक्रीम खिलाई
दाल चावल खाने के लिए भी कहा थोड़ा बहुत समय वहां बिताकर
फिर हम औरोबिंदो आश्रम की बेकरी में गये लेकिन
वहां जाकर मालूम पड़ा कि
वह बंद हो चुकी है
नीरा को उसके घर छोड़
हम दिल्ली से अलीगढ़ के
लिए निकल पड़े
रास्ते में आम के बागों
के बीच बने एक होटल में
बहुत ही लजीज खाना खाया
वहां एक पालतू कुत्ते
जिसका नाम रॉक्सी था से भी मुलाकात हुई
चलते समय दिल्ली में भी
हल्की सी आंधी और बूंदाबांदी थी
यहां भी थी चूंकि
आम के पेड़ों पर से अमिया
टूट कर जमीन पर बिखरी पड़ी थी
उन्हें देखकर मुंह में पानी भर रहा था लेकिन
उन्हें छूने का जुर्माना ₹500 था तो फिर कौन रिस्क ले
अलीगढ़ पहुंचते ही
नीरा के भाई के घर
उसके द्वारा दिया सामान उतारा जिसमें उसकी भतीजी के लिए एक सूट, उसके पापा का ट्रिमर और उसके बेटे द्वारा गलती से रखा हुआ आम का अचार था
घर पहुंच कर
मैं अपने पड़ोस में अंकल को देखने चली गई
जिनकी 16 मार्च को दिल्ली में ओपन हार्ट सर्जरी हुई थी
प्रदीप चौहान को बाइक से उसके चाचा का बेटा लेने आ गया था
उसकी 5 साल की बेटी काव्या से भी पहली बार मिली
वह डांस बहुत अच्छा करती है
यह सब हुनर कुछ भाग्यशाली लोगों को भगवान की देन होते हैं
घर का ताला खोलने समय
लंदन से मेरी बहन सबरीना की कॉल आ गई
उससे बहुत लंबी बातचीत हुई
कुल मिलाकर कितना यादगार दिन बिता ना मेरा और सबका
एक खुशनुमा आंधी और हल्की बारिश की फुहारों वाले मौसम की ही तरह।
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