एक यात्री की जीवन यात्रा


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मैं एक यात्री हूं

तुम भी तो एक यात्री ही हो और

तुम भी

देखा जाये मेरे प्यारे साथियों तो

हम सब इस संसार में

एक यात्री ही हैं

हर कोई अपनी जीवन यात्रा

अपनी योग्यतानुसार व

अपनी परिस्थितयों के अनुरूप

तय कर रहा है

इस यात्रा में

कोई साथ चल रहा है तो

कोई हमसे आगे तो

कोई पीछे छूट जाता है

पड़ाव अलग हो सकते हैं

घटनाक्रम भी शायद थोड़े बहुत

भिन्न

साथी भी बदल सकते हैं लेकिन

मंजिल अंत में सबकी एक ही है

मंजिल तक पहुंचने का

सबका तरीका अलग हो

सकता है लेकिन

कुछ लोगों का आपस में

मिलता भी है और

जब कभी उनका

आपस में मिलना होता है तो

उनके आपस में संबंध भी

मधुर बनते हैं और

उनका समय एक दूसरे के साथ

थोड़ा सा अच्छा गुजर

जाता है  

सुख और दुख

इन दोनों का आना

जाना जीवन रहते

लगा रहता है

रास्ता कट ही जाता है

मंजिल आ ही जाती है

पलक झपकते ही

जिंदगी खत्म हो जाती है और

मौत इस थके हुए यात्री को जो

अपने जीवन की लम्बी यात्रा

पूरी करके इस अंतिम

बिंदु तक पहुंचा है को  

एक गहरी नींद में हमेशा के

लिए सुला देती है।


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