एक मां सी


0

चाय का बागान है
हरियाली की एक सुंदर छटा बिखेरता
रेशम रेशम
कोमल बिछौने सा
रोशनी से भरा एक जहां हैं
नीले रंग का आसमानी
सफेद बादलों से भरा
एक सिर पर शामियाने सा तना
आसमान है
पहाड़ियों से घिरा
पेड़ों की कतारों से सजा
यह बाग किसी के
दिल का भी टुकड़ा है
इसकी धरा से जो है उपजता
उसी से इस पर आश्रित
न जाने कितनों का पेट है पलता
कहने को तो यह जमीन
एक मिट्टी की परत भर है लेकिन
कितनी उपजाऊ
कितनी पोषक
कितनी रहमदिल
कितनी दयालु
कितनी हमदर्द
एक मां सी
अपनी कोख से उगले
स्वर्ण चांदी के आभूषण।


Like it? Share with your friends!

0

0 Comments

Choose A Format
Story
Formatted Text with Embeds and Visuals