दिखती हूं
शांत लेकिन
हूं नहीं
अशांति की जड़ें मन के
धरातल के भीतर कहीं
गहरी एक नाग के फन सी
तनी हुई बैठ गई हैं
कोई यत्न तो आवश्यक रूप से
करना होगा
इस नाग के फन को कुचलना
होगा
यह मुझे डसकर मौत के घाट
उतार दे
उससे पहले इसका काम
तमाम करना होगा।
दिखती हूं
शांत लेकिन
हूं नहीं
अशांति की जड़ें मन के
धरातल के भीतर कहीं
गहरी एक नाग के फन सी
तनी हुई बैठ गई हैं
कोई यत्न तो आवश्यक रूप से
करना होगा
इस नाग के फन को कुचलना
होगा
यह मुझे डसकर मौत के घाट
उतार दे
उससे पहले इसका काम
तमाम करना होगा।
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