खुशी का अवसर है तो
क्यों न हम सब मिलकर खुश हो लें
खुशी की कलियों को दिल की बगिया में खिलायें
दुख के कांटों को सूती कपड़े की पोटली में बांधकर पास बहते एक दरिया में बहायें
गंगा स्नान करने गंगा तट पर न भी जा सकें तो
एक दूसरे की आंखों में उतरते आंसुओं की लहर को तत्काल प्रभाव से
प्रेम भरे स्पर्श से सुखायें
खुशियों का कोई मोल नहीं है
यह अनमोल हैं
खुशियों के पल जो जीवन में मिलें तो
उन्हें कभी न गंवायें
कोई बात, दृश्य या त्योहार
कुछ भी रोमांचित न करे तो
एक दूसरे के मुस्कुराते चेहरों को देखकर ही
मुस्कुरायें।
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