जिंदगी
तू आखिर चाहती क्या है
जिसको जन्म देती है
इस धरती पर लाती है
उसकी जिम्मेदारी क्यों नहीं उठाती
उसका जीवन चक्र
ठीक प्रकार से पूरा क्यों नहीं करती
तू कुछ लोगों की भाग्य की रेखा को चमकाती चली जाती है तो
कुछ के जीवन की बगिया ही
असमय तहस-नहस कर देती है
इस तरह का भेदभाव आखिर
क्यों करती है
कुछ लोगों को तू पसंद करती है तो कुछ को इस हद तक नापसंद कि बेवक्त उनकी खुशियां,
उनकी सांसे, उनका सर्वस्व
छीन लेती है
देख आज तुझे एक वायदा
तो करना होगा कि
हर किसी को समान नजर से देख सबका ख्याल रख
सबको एक खुशहाल जिंदगी दे
किसी के ऊपर एक आकाशीय
बिजली न गिरा कि
उसे संभलने का मौका भी न मिले
होने दे हर किसी के ख्वाब पूरे
न कर किसी को मायूस
क्या बिगड़ेगा तेरा पगली जो
दे देगी हर किसी को तू
एक खुदा की पनाहों सा ही
सहारा।
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