एक अकेली औरत कभी अबला नहीं होती


0

औरत फौलाद की बनी होती है

जब टूटता है उस पर कोई

दुखों का पहाड़

मन से होती है दुखी

पड़ जाती है इस दुनिया की भीड़ में तन्हा तो

अपने जीवन के पथ पर

वह अपने दम पर अकेली संघर्ष करती है 

उसके माथे पर शिकन की एक

लकीर तक नहीं उभरती

होठों पर सदैव एक मुस्कान खिली

रहती है

वह एक दैवीय शक्ति का

अंबार खुद के भीतर कहीं

समेटकर जादुई तरीके से

अपने हर कार्य को प्रतिपादित

करती है

वह अपना रोना किसी के

आगे नहीं रोती अपितु

दूसरों के दुख तकलीफ बांटकर

उनकी कठिनाइयों व चुनौतियों को गहराई से समझकर

उन्हें अपना समझकर

सही मार्गदर्शन देती है

उनकी हिम्मत बढ़ाती है

उनकी यथासंभव मदद करती है

एक अकेली औरत कभी अबला

नहीं होती

गर वह समय रहते संभल जाये और 

अपने भीतर छिपी दैवीय शक्तियों

को पहचान ले तो वह

इस पूरी दुनिया का काफिला

अपने साथ लेकर चलने का

हौसला रखती है।


Like it? Share with your friends!

0

0 Comments

Choose A Format
Story
Formatted Text with Embeds and Visuals