उम्र के दरिया को हंसते हुए पार करना है


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किसी के चेहरे पर
मुस्कुराहट हो या न हो
इससे कोई फर्क नहीं पड़ता बशर्ते
वह भीतर से खुश हो
उसका मन प्रसन्न हो
वह एक प्रसन्न चित्त व्यक्तित्व का
स्वामी हो
किसी के लब मुस्कुराते हों लेकिन
उसकी आंख रोती हो तो
बात कुछ समझ नहीं आती
न मुस्कुराये होंठ किसी के
न खिलखिलाकर हंसे हर बात पर कोई न एक फूल सा खिला दिखे किसी का चेहरा तो
कोई बात नहीं
वह आदमी संजीदा भी हो सकता है उसकी आदत नहीं
कोई मजबूरी नहीं कि
वह अपनी खुशी जाहिर करेगा
हर बात पर
किसी को भी यह जानने की
कोशिश करनी है और
एक बार नहीं
लगातार करनी है कि
वह भीतर से खुश है
गर है तो चिंता की कोई
बात नहीं
उदास है तो
कारण तलाशना होगा
किसी ठोस कारण से है
कुछ समय के लिए है
समय के साथ ठीक हो जायेंगे
अपनी सामान्य अवस्था में
लौट आयेंगे तो
घबराने की आवश्यकता नहीं
यह उदासी के बादल एक लंबे
समय तक जो छाये रहें
मन मस्तिष्क के पटल पर तो
विषय निश्चित तौर पर
गंभीर है
इस दुख के दलदल से खुद को
निकालना होगा
खुद का ही साथी बनना होगा
खुद को समय-समय पर
संभालना होगा
खुद को खुश रखना
खुद की ही जिम्मेदारी है
खुद को खुश रखने पर
स्वयं ही कार्य करते रहना होगा
यह बात तो
बिना देर लगाये
जल्दी से समझ लेने की है
उम्र के दरिया को हंसते
गाते खेलते हुए पार करना है
रोते हुए नहीं
यह बीड़ा तो अपने कंधों पर
अपनी समझदारी का परिचय
देते हुए उठाना ही होगा।


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