चिड़िया के पंख होते हैं और
वह दिखते भी हैं
उन पंखों के सहारे ही
वह जमीन से ऊपर खुद को उठाकर
आसमान में उड़ने का साहस जुटा पाती है
एक पेड़ की डाली पर अपना घोंसला बना पाती है
एक घर की मुंडेर पर सुस्ताने के लिए
पल दो पल के लिए बैठ पाती है
बिना पंखों के तो वह फिर
जमीन पर ही विचरती रहेगी किसी
जीव जंतु की भांति या
रेंगती रहेगी एक कीड़े सी
उम्मीदों के भी पंख होते हैं
वह बेशक नहीं दिखते हों किसी को
चिड़िया के पंखों की तरह
खुली आंखों से लेकिन
आंखें बंद करने पर अपने होने का अहसास
किसी उम्मीद करने वाले को हमेशा करवाते हैं
उम्मीद का किसी के दिल में पलना भर काफी नहीं
उसमें पंखों को लगाकर उड़ान भरने की कोशिश करना भी
आवश्यक है
उड़ान छोटी हो या बड़ी
सफलता मिलेगी या नहीं
मंजिल हासिल होगी या नहीं
सपने फलीभूत होंगे या नहीं
कहानी पूरी होगी
या अधूरी है
यह सब किसी के जीवन की किताब का अंतिम पन्ना
उसके जीवन के सफर का अंतिम छोर है
प्रथम या प्रारंभिक बिंदु नहीं
बिना किसी गंभीर मुद्रा को धारण करे
उम्मीद के पंखों के सहारे उड़ान भरें अपने लक्ष्य को भेदती हुई
कर्म करते चलें फल की इच्छा कदापि न करें
उम्मीद के पंखों को इस दुनिया के लोग जब तब काटेंगे भी लेकिन
फिर वह उम्मीद ही क्या जो इतनी आसानी से हार मान ले और
बिना पंखों के जमीन पर खुद को
पटकी लगाकर एक कोने में पड़ी रहे उम्मीद को तो हमेशा ही
अपने पंखों को बार बार समेटकर उड़ान भरते रहना है
चाहे हो जाये वह कितनी बार ही विफल क्यों न
तब तक उड़ान भरनी है जब तक सफलता प्राप्त न हो जाये।
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