पहले सूरज साथ लेकर चलती थी
अब उनकी यादों का दीपक साथ लेकर चलती हूं
जैसा भी है समय और
जैसे भी हैं हालात लेकिन
उनकी यादों के सामान को हमेशा साथ बांधकर चलती हूं।
पहले सूरज साथ लेकर चलती थी
अब उनकी यादों का दीपक साथ लेकर चलती हूं
जैसा भी है समय और
जैसे भी हैं हालात लेकिन
उनकी यादों के सामान को हमेशा साथ बांधकर चलती हूं।
0 Comments