रिश्तों की डोर
उलझ गई है
यह तो समय के साथ
और अधिक उलझती जा रही है
मैं इस उलझन को सुलझा पाने में असमर्थ हूं
इस प्रेम के धागे में
कोई तो है जो गांठ लगा रहा है
इसमें आग लग रहा है
इसे जलाकर भस्म कर रहा है
इसे खींचकर तोड़ रहा है
इसे टुकड़े-टुकड़े कर रहा है
एक तरफ से यह षड्यंत्र रचा जा रहा है तो
दूसरी तरफ प्रेम का अस्तित्व वर्चस्व में कैसे रह पायेगा
आज के युग में
प्रेम हार गया
सच नाकाम रहा
दिल की धड़कनों का न
कहीं नामोनिशान रहा
जो कुछ जीता
वह वीभत्स था,
भयावह,
अप्रत्याशित
मेरी सोच, समझ और
कल्पना से परे।
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