इश्क के अहसास की बारिश में


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मेरा चांद
मेरे पास है
इन सितारों से मुझे नहीं फिर कोई सरोकार
अंधेरों का नहीं कोई खौफ
रोशनी बरसाते नूर की भी नहीं चाहत
न किसी मंजिल की तलाश
न किसी सपने के टूटने का डर
अपनी ही पनाहों में कैद हम दोनों
एक दूसरे को बाहों में समेटे
दिल की धड़कन भी एक है
सांसों की सरगम की धुन भी एक है
इश्क के अहसास की बारिश में
दोनों की खुमारी भी एक है
दोनों के जिस्म की महक भी
एक दूसरे में जज्ब है
दो जिस्म एक जान हैं
यही वो पल हैं जहां मिल रहा खुशियों का खजाना
यही वो जगह है जहां मिल रहे जमीं और आसमां
यही वह जिंदगी का मोड़ है जहां मिल रही हमारी मोहब्बत की राहें
हम हो रहे दो से एक
आगे जो होगा वह खुदा की मर्जी।


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