शहर में
एक चौराहे पर
खड़ी
देखती रहती हूं
गांव की तरफ जाती हुई
मेरे शहर की सड़क को
शहर की सड़क ही तो गांव की
सड़क से किसी मोड़ पर मिल
जाती है
फिर उनसे जुड़ जाते हैं
हरे-भरे खेत
बाग बगीचे और
पगडंडियां
किसी वाहन से सफर करते
समय भी
सड़क किनारे बसे गांव की
सड़क दिख जाती है
कुछ भी कह लो
मन को शांति का
इन गांव की सड़कों पर
चलकर या
इन पर से होकर गुजरते हुए या
इनके बारे में कल्पनाओं में
सोचते हुए
अहसास तो होता है
शुद्ध हवाओं का स्पर्श तो
मिलता है
कोयल की वाणी
मोर का नृत्य
गाय, बैल, बकरियों आदि के
झुंड तो
बीच रास्ते टकराते ही हैं
नदी या नहर या
किसी तालाब
चाहे वह सूखा हो या
लबालब जल से भरा का
किनारा अक्सर मिल ही
जाता है और
उसके किनारे ठहरकर
कुछ देर कुछ पल सुकून के भी।
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