रास्ता है
मंजिल है तो
जाहिर सी बात है कि
राहगीर के मन में कहीं गहरा समाया किसी के लिए इंतजार भी है
इंतजार
आसमान पर लहराती काली घटाओं के
सिमट जाने का या
कपास के फूलों से सफेद बादलों का रिमझिम बारिश की बूंद में बदलकर बरस जाने का
इंतजार
पेड़ों के पत्तों का पतझड़ के मौसम में झड़ जाने का या
बहारों के आगमन पर उन पर लदी कलियों के चटक जाने का
इंतजार
किसी नये के आने का या
किसी पुराने के चले जाने के पश्चात उसके पुनः लौटकर आने का
इंतजार
पटरी पर दौड़ती किसी रेलगाड़ी का या उससे उतरते मुसाफिरों का
इंतजार कुछ पल का या उम्र भर का या कहीं कुछ देर इन मनोहारी दृश्यों को ताककर
कुछ समय अपना मन बहलाकर
सुस्त कदमों से अपने घर वापस लौट जाने का।
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