इंतजार कभी खत्म हो सकता है क्या


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आज मुझे

आने वाले कल का है इंतजार

उससे पहले

दोपहर का फिर

सांझ का फिर

रात का फिर

चांद का फिर  

सितारों का फिर

मीठी नींद का फिर

सुंदर सपनों का फिर

हर सुबह उगने वाले सूरज का फिर

हवा के चलने का

बारिश के बरसने का

फूलों के खिलने का

परिन्दों के चहचहाने का

लोगों की हलचल का

सड़कों पर उपजती चहल पहल का

उनके आने का

दिल में सुख के अहसास के भर जाने का

दुख के बादल के छंट जाने का

‘इंतजार’

जब तक जीवन की

आखिरी सांस होती है

कभी खत्म हो सकता है

क्या।


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