आशा के एक कंकड़ मात्र से


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मेरे दिल की बगिया में
आशा का एक फूल लहराया जो
मेरे लिए बहारों के आगमन का संदेशा लाया
किसी मंजिल को पाते रास्ते को तय करने के लिए भी
पहला कदम उठाने की आवश्यकता पड़ती ही है
हर रोज सुबह सूरज आसमान में
अकेला ही उदय होता है
अपने साथ किरणें हजार लिए जो फैलाता है फिर जग में उजियारा आसमान एक है
जमीन एक है
यह कायनात एक है
सूरज एक है
चंद्रमा एक है
यह सृष्टि एक है
ईश्वर एक है
इंसान भी अकेला ही काफी है
उसके मन मस्तिष्क के पटल पर
आशा का एक छोटा पौधा  
लहराता रहे तो
वह अकेला ही सक्षम है
उसमें हौसले का दम भरते रहने के लिए आशा की एक प्रकाश की किरण से
हर तरह का अंधकार मिटाया जा सकता है
आशा के एक कंकड़ मात्र से
निराशा के भीमकाय पहाड़ को
मिट्टी के एक टीले की तरह
दरकाया जा सकता है।


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