आवेश में आकर
तुम कुछ गलत काम को
अंजाम मत दे देना
ओ पथिक
वह कृत्य कहीं इस हद तक गलत न हो कि
तुम्हें बाद में हमेशा के लिए पछताना पड़े
हो सकता है पछतावा कभी किसी को न भी हो लेकिन
कुछ गलत करके कोई खुद फंसे नहीं
यह कैसे मुमकिन है
क्या अच्छा हो कि
समय रहते
हम अपनी भावनाओं पर नियंत्रण करने का
हुनर सीख लें
इसे जब तब प्रयोग में लाकर देखें
इस जंग में सफल होने की कोशिश करें आवेश के वह पल
जो साबित हो सकते हों भविष्य के लिए घातक को
तत्काल प्रभाव से रोक दें
उन पर काबू पायें
उन्हें किसी भी तरह से बस रौंद दें
आवेश में जब कभी आयें तो
प्रभु का स्मरण करें
अपने चित्त को शांत करने का प्रयत्न करें कोई जाप मन ही मन में करें
अपने जीवन के मधुर पलों को याद करें
किसी भी घटना को अस्थाई समझें
उसके जाल में फंसे नहीं अपितु उससे बचे
थोड़ा मुस्कुरा लें
कोई गीत गुनगुना लें
कोई गिनती या पहाड़ा ही एक बच्चे सा अपने होठों से बुदबुदा लें
कोई भी उपाय करें लेकिन
आवेश के पलों को जलाकर एक भस्म सा
शांत करें
समय की छड़ी की मार से बेहतर हैं
जादू की छड़ी खुद पर समय रहते चलाना सीख लें।
0 Comments