आपकी खामोशी
महज आपकी आदत है या
कुछ और
कहीं आप भीतर से कहीं गहरे उदास तो नहीं
गर ऐसा है तो फिर
यह ठीक नहीं
तोड़नी पड़ेगी फिर तो खुद ही
यह चुप्पी और
बजाना पड़ेगा सुरों से सजा हुआ
कोई साज
कोई सुनने वाला मिले या न
मिले
यह चिंता भी छोड़नी होगी
खुद ही वक्ता
खुद ही अपने दिल की छिड़ी मीठी
तानों बानों की बातों का श्रोता बनना पड़ेगा
इस प्रक्रिया में बेशक थोड़ा समय
लग सकता है लेकिन
खामोशी का बांध अंतत: टूटकर एक झंकार सा पायल के घुंघरूओं के शोर सा झनझनायेगा।
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